Monday, 10 August 2020

तुम्हारी मैं

 इस पूरी दुनिया में सबसे ज़्यादा प्रिय

प्रिय तुम                                                        

तुम्हें लिख रही हूँ

पर देखा जाए तो वजह कायदे से कुछ भी नहीं... 

तुमसे बात तक किए  एक अरसा गुज़र चुका है, और अब हूक की जगह सुकून ने ले ली है...

कुछ भी पाने की आरज़ू ख़त्म है हाँ पर फिर भी गले लगना चाहती हूँ कस के, तुम्हें देखना चाहती हूं जी भर के..हाँ बस इतना ही...

जानते हो मेरे पास आकाश के तारों जितने सवाल होते हैं पर तुम्हारी आवाज़ सुनते ही वो सारे सवाल खो जाते हैं कहीं... तुम डांट रहे होते हो और मैं तुम्हारी आवाज़ को घूंट घूंट खुद में जाता महसूस कर रही होती हूँ, अजीब हालात हैं शायद ज़रा बचकाना भी पर  इश्क़ बच्चा बना देता है और बेवकूफियां आपके सिर चढ़ के बोलती हैं, पूरी दुनिया के लिए मैं समझदार हूँ और तुम्हारे आगे जाने कैसे बिल्कुल बेवकूफ हो जाती हूँ

जानते हो तुम्हारी बेरूखी से बेज़ार हो कर कई बार कोशिश की कि तुम्हारे ख्याल को अपने वजूद से उतार कर परे रख दूं कई बार चाहा  कि तुम्हारी जगह किसी ऐसे को दे दूं जो आसानी से हासिल हो जाए पर हर बार हर किसी में तुम्हें ही तलाशा... तुम्हें ढूंढती रही पर तुम तो एक ही हो ...ना तुम मिले ना तुम्हारी जगह किसी और को दे पाई.. 

तुम पर आकर अटक सी गई हूं मैं ना आगे जा पाती हूँ ना पीछे ही लौट पाती हूँ...

मैं कभी सवाल नहीं करती, किसी से भी नहीं, अच्छे बुरे किसी हालात में नहीं पर तुम्हारे लिए ही मेरे सारे सवाल हैं और तुम्हारा हर जवाब मुझे तुम्हारे कुछ और करीब ले आता है...

जब कहते हो कि फीलिंग्स म्युचुअल हैं तो दिल करता सारी रवायतें उठा दूं और सब तोड़ के छोड़ के दफ़ा कर के बस तुम्हारे पास आ जाऊं फिर रोकती हूँ खुद को , ज़िम्मेदारी हैं तुम्हारे हिस्से जानती हूँ, जानती हूँ कि तुम्हारी उलझनों का आकार मेरी सारी बेचैनियों से कहीं बड़ा है मुझे अब कोई उम्मीद भी नहीं कि इस ज़िन्दगी में कभी तुम्हारे नाम को खुद से जोड़ सकूंगी पर इतना ज़रूर जानती हूँ कि मेरे अंदर जो कुछ भी है वो सब कुछ सिर्फ़ तुमसे जुड़ा है तुम ना भी हो तो तुम्हारे ख्यालों के साथ ज़िन्दगी जी सकती हूं... 

जब कहते हो के हमारे बीच कुछ भी नहीं तो मैं सबसे पहले खुद की आँखें देखती हूँ वहाँ जब तक तुम नज़र आओगे मैं जानती हूँ तुम हो क्योंकि जब तुम नहीं थे मैं महसूस कर पाई थी...

 जाने क्या है हर बार हर कसौटी दिल अकेले पार कर लेता है इसे किसी नियम कायदे की ज़रूरत नहीं निरा बेवकूफ जो ठहरा तो जब तक यह ना कहे कि कुछ नहीं बचा, नहीं मानूंगी...तुम्हारे कहने से भी नहीं

अक्सर लोग सवाल करते हैं तुम्हारी ज़िन्दगी में कोई है, मैं साफ कहती हूँ नहीं है क्योंकि जो हालात हैं तुम मेरी ज़िन्दगी में नहीं हो, हो भी नहीं सकते पर तुम मुझमें हो मेरी आँखों में, यादों में, धड़कनों में, हर ख़्याल में पुरवजूद पर तारी... 

मेरा इश्क़ समझते हो तुम, एक तुम्हीं हो जो ये जानते हो कि पाने खोने से इतर मैं सिर्फ प्यार में हूँ अक्सर लोग कहते हैं कोई भविष्य नहीं है मेरे इस जुड़ाव का और मैं फिर भी जानती हूँ मुझे वहीं होना है जहाँ मैं हूँ क्योंकि प्रेम है कोई म्युचुअल फंड थोड़े है कि रिटर्न्स की फिक्र करूँ

किसी के कुछ भी समझाने का फायदा अब नहीं होता, मैं इश्क में हूँ

 हाँ चलो आज सरेआम  मान भी लिया कि हाँ मैं हूँ प्रेम में और इतनी पूरी हूँ कि किसी और की गुंजाइश तक नहीं 


गणित चाहे ज़िन्दगी के स्कूल का हो या स्कूल वाली ज़िन्दगी का मैंने हमेशा कठिन चुना, जो सबको आसान लगता मुझे मुश्किल लगता और जो सबको मुश्किल लगता मैं वही सवाल ठीक ठीक सुलझा कर आती, इस तरह अपनी ज़िन्दगी में कभी कुछ भी आसान नहीं चुनने वाली रही हूँ मैं, और शायद तभी तो तुम हो मेरे लिए ...


भौगोलिक समीकरणों में चाहे तुम कहीं भी हो पर मुझमें सिर्फ तुम हो थे रहोगे ताउम्र, और साथ ही रहेंगी मेरी बेवकूफियां... ऐसी ही हूँ मैं और रहूँगी हमेशा सिर्फ़ तुम्हारी होकर...         

 तुम्हारी और सिर्फ़ तुम्हारी-मैं

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