Sunday, 12 April 2020

यूं ही बैठे ठाले...मेरा घर...

मेरे लिए घर का मतलब है ज़रा सा बेढंगापन....
जो जहाँ है, वो वहीं रहे तो ये मुझे जीवन का ठहर जाना लगता है, बिस्तर की सिलवटों से मुझे बिल्कुल उलझन नहीं होती बल्कि 24 घंटे सजे संवरे घर से कोफ्त होती है,अजीब सा लगता है।
चुक्कू, यानि बेटी के बिखरे खिलौने, मेरी औंधी पड़ी किताब, कॉफी का मग और कोने में पड़ा मनी प्लांट मुझे सुकून देता है।
मेरे लिए सफ़ाई सिर्फ हाइजीन का ध्यान रखना है ना कि कोई दिमागी फ़ितूर कि हर वक़्त जिसमें उलझा रहा जाए, ठंड का मौसम हो तो बिना नहाए खाए लगातार पढ़ सकती हूँ किताबें इश्क़ हैं मेरा, फ़िल्म देख सकती हूँ-मेरे नज़दीक ज़िन्दगी का आईना हैं ये, किसी बात का अंकुश बर्दाश्त नहीं होता मुझसे-घुटन होती है, झुंझला जाती हूँ, तो बेतरतीबी मेरी आदत नहीं मेरा स्वभाव है और मेरा घर मेरी बेतरतीबियों में ही पुरसुकून रहता है...
यूं भी घर वो जगह है जहाँ आप सुकून से अपने पाँव फैला सकें...जैसे हों वैसे रह सकें, बिल्कुल वैसे जैसे आपका मिजाज़ हो बेलागलपेट, बेरोकटोक... जहाँ आप पर किसी औपचारिकता का बोझ ना हो, जहाँ मुश्किलें मिनटों में सुलझें या नहीं पर उनसे लड़ने की हिम्मत ज़रूर मिल जाए, घर का मतलब महज़ चाहरदीवारी और छत नहीं है बल्कि वो 'मी स्पेस' है जहाँ आप एक मुकम्मल शख्स बनने के प्रॉसेस में कुछ वक़्त का ठौर पा सकें...
यूं कह लीजिए कि ज़िन्दगी के खेल का टाइम प्लीज़ है घर..और ये घर किसी अपने की गोद या आपके वजूद को समेट लेती बाहें भी हो सकता है...
यूं तो बेतरतीब होने को दुनिया गुनाह मानती होगी पर मुझे लगता है कि ये बेतरतीबी ही स्वाभाविक है। दुनिया की हर शय जो ज़रा बेतरतीब है, raw है अधपकी सी है, अल्हड़ है, खूबसूरत है।
 मुलम्मे चढ़ी नफ़ासत पसंद ज़िंदगी ज़रा नकली सी हो जाती है, नहीं?? कम से कम कोई एक ऐसा कोना तो हो कि जहाँ आप तमाम नकली चेहरे मुलम्मे सबकुछ उतार कर रख ही सकते हों, हैं ना??? घर बस वही जगह है...
 हाँ मैंने देखा है लोगों को करीने से सजा बुत बनकर अपना आप खोते हुए...बस इतना कि घर अपनाइयत का मोहताज़ है, चाक-चौबंद सफाई सिस्टम का नहीं वरना घर और पाँच सितारा होटल में और फर्क ही क्या है ...
अपनी बात करूं तो जाने क्यों बिखरी सी उलझनों में मैं खुद को बेहतर तलाश कर पाती हूँ...और बस ऐसा ही बिखरा सा है मेरा घर...जहाँ रोटी की सौंधी ख़ुशबू नहीं सपनों की मद्धिम आँच रहती है....
हाँ मेरा घर....ज़रा बेतरतीब पर अपना सा....

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